डेगाना विधानसभा सीट राजस्थान का एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यहाँ आज़ादी के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव 1952 में आयोजित हुए। इस चुनाव में अखिल भारतीय रामराज्य परिषद के भोपाल सिंह डेगाना के पहले विधायक बने।
1957 के विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की गोरी पूनिया ने जीत दर्ज की और वे डेगाना क्षेत्र की पहली महिला विधायक बनीं। इसके बाद 1962 और 1967 के विधानसभा चुनावों में भी गोरी पूनिया लगातार तीन बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुनी गईं।
डेगाना चुनावी इतिहास 1952- 2023
1972 के विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के रामरघुनाथ चौधरी को जीत मिली। उन्होंने स्वतंत्र पार्टी के मदन सिंह को बड़े मतांतर से पराजित किया।
1977 और 1980 के विधानसभा चुनावों में भी रामरघुनाथ चौधरी लगातार जीतते रहे और डेगाना क्षेत्र में कांग्रेस का वर्चस्व बना रहा।

1985 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के कल्याण सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी रामवल्लभ को हराकर जीत हासिल की।
1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल से रिछपाल पाल सिंह विधायक बने। इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने में सफल रहे।
Degana Assembly Seat 1952–2023
2003 के विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से रिछपाल पाल सिंह ने जीत दर्ज की और भाजपा प्रत्याशी को पराजित किया।
2008 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अजय सिंह किलक को जीत मिली।
2013 के विधानसभा चुनाव में भी अजय सिंह किलक ने लगातार दूसरी बार भाजपा के टिकट पर विजय प्राप्त की।
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के विजयपाल मिर्धा ने भाजपा प्रत्याशी अजय सिंह किलक को भारी मतों से हराया।
2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अजय सिंह किलक पुनः डेगाना विधानसभा सीट से विजयी घोषित हुए।
| वर्ष | विजेता प्रत्याशी | पार्टी | प्राप्त वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| 1952 | भोपाल सिंह | अखिल भारतीय रामराज्य परिषद | — | — |
| 1957 | गोऱी पूनिया | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | — | — |
| 1962 | गोऱी पूनिया | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | — | — |
| 1967 | गोऱी पूनिया | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | — | — |
| 1972 | रामरघुनाथ चौधरी | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 35,700 | ≈ 70.4% |
| 1977 | रामरघुनाथ चौधरी | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 30,858 | ≈ 48.6% |
| 1980 | रामरघुनाथ चौधरी | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 24,109 | ≈ 43.5% |
| 1985 | कल्याण सिंह | जनता पार्टी | 48,216 | ≈ 65.0% |
| 1990 | रिछपाल पाल सिंह | जनता दल | 53,034 | ≈ 63.4% |
| 1993 | रिछपाल पाल सिंह | निर्दलीय | 64,512 | ≈ 47.5% |
| 2003 | रिछपाल पाल सिंह | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 56,352 | ≈ 45.3% |
| 2008 | अजय सिंह किलक | भारतीय जनता पार्टी | 59,662 | ≈ 43.2% |
| 2013 | अजय सिंह किलक | भारतीय जनता पार्टी | 49,526 | ≈ 41.2% |
| 2018 | विजयपाल मिर्धा | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 95,362 | ≈ 58.7% |
| 2023 | अजय सिंह किलक | भारतीय जनता पार्टी | 88,752 | 46.23% |















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